“aao kuch kaam kare, do pal fursat ke naam kare…”

आओ कुछ काम करें। 

दो पल फुर्सत के नाम करें॥ 

 

बहुत हुई ये भाग दोड़। 

आओ थोडा आराम करे॥ 

 

जिंदगी भर भागे हैं हम किसी किसी लक्ष्य के पीछे। 

आओ राह पर बेठ थोडा थकान को प्रणाम करे॥ 

 

बहुत हुआ दोस्तों को सिर्फ याद करना। 

आओ एक शाम सिर्फ दोस्तों के नाम करे॥ 

 

व्यस्त रहने लगे हैं, 

परिवार के साथ समय नही बिता पाते। 

चलो एक दिन काम को रामराम कहें, 

और परिवार से ख़ुशी का इनाम लें। 

 

माँ ने कभी काम को तवज्जो नही दी हमारी फर्माहिश के आगे, 

आज काम की वजह से माँ के लिए फुर्सत नही मिलती। 

आज माँ के आँचल में खो, 

और थोडा आराम करें॥ 

जिस पिता ने पूरी जिंदगी लगा दी इस मुकाम पर पहुचने पर पहुँचाने मे, 

आज पिता के हाल पूछ, 

उनकी बाहों में सिमट सुकून के दो पल अपने नाम करे॥ 

 

आओ कुछ काम करें। 

दो पल फुर्सत के नाम करें॥ 

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